कैसे कह दूंँ कि इंतज़ार नहीं
और जब फ़िराक़ ने कहा होगा कि - 'तेरे आने की क्या उमीद मगर, कैसे कह दूंँ कि इंतज़ार नहीं' तो उनका दिल कितना डूबा रहा होगा। उमीद न होने के बावजूद इंतज़ार करने की क़ुव्वत दिमाग़ में नहीं है। ऐसी तवक़्क़ो इश्क़ में सने हुए - डूबे हुए दिल से ही की जा सकती है।
दरअस्ल उमीदी और ना उमीदी दिमाग़ के सब्जेक्ट्स हैं, दिल का इनसे कोई वास्त: नहीं। दिन शुरू होते ही, किसी का इंतज़ार इस यक़ीन से करना कि बस वो आता ही होगा और दिन ख़त्म होने पर इस यक़ीन के साथ आँखें मूंदना कि कल तो आ ही जाएगा - यह दिल की टेरिटरी में ही मुम्किन है। यानी दिल के पास 'यक़ीन ' ही इकलौता सब्जेक्ट है। दिमाग़ के हवाले से सोचें तो बड़ी बचकानी हरकत मालूम होती है और दिल के हवाले से देखें तो लगता है कि अभी भी कोई कमी रह रही है। फ़िराक़ यह शे'र कहते हुए जिस जगह रहे होंगे, मैं भी कई बार अपने आप को वहीं पाता हूंँ।
इस शे'र में 'मगर' से लेकर 'नहीं' तक एक अजब दुनिया बसती है। 'मगर' दिल का सबसे पसंदीदा लफ़्ज़ है। 'मगर वो आ भी सकता है', 'मगर वो मान भी सकता है', 'मगर वो प्यार भी तो करता है' जैसे जुमले दिल अक्सर इस्तेमाल में लाता रहता है। लेकिन 'नहीं' का इस्तेमाल भी दिल के पसंदीदा इस्तेमालों में से एक है। दिल लफ़्ज़ ए नहीं का इस्तेमाल हमेशा पॉजिटिव सेंस में करता है। जैसे इस शे'र में ही देख लें। 'क्या उम्मीद' के तुरंत बाद 'मगर' उम्मीद की दूसरी शक्ल बनकर आ रहा है और 'इंतज़ार' के बाद 'नहीं' इस पूरी बात को दम खम के साथ ख़त्म कर रहा है।
मैं इस सोच का मद्दाह रहा हूंँ कि दुनिया भर का अदब इंसानी दिल के लिए लिखा गया है, न कि दिमाग़ के लिए। दिल बहुत दिनों तक किसी एक ख़याल को लेकर जी सकता है - मर सकता है, दिमाग़ नहीं। अदब स्टेबल सेंस को पैदा करने के लिए - बनाए रखने के लिए लिखा जाता है - इसलिए दिल से अच्छा क़ारी कोई नहीं हो सकता। अदब किसी भी मुआशरे में अनस्टेबिलिटी नहीं ला सकता, और अगर ले आए तो यह समझना चाहिए कि यह स्टेबिलिटी की ओर एक पुरज़ोर क़दम है।
किसी के इंतज़ार से शुरू हुई बात जब अदब और अदब से मुआशरे तक पहुँच जाए तो विद्रोही याद आने लगते हैं। विद्रोही कहते हैं - ' तुम्हारा सौंदर्य मुझे बिस्तर से समर की ओर धकेलता है - मैं तुम्हें इसलिए प्यार करता हूँ कि जब भी मैं तुम्हें देखता हूंँ तो मुझे लगता है कि क्रांति होगी'। किसी का इंतज़ार करते हुए या किसी को याद करते हुए، इतना कुछ लिखा जा सकता है - समझा जा सकता है, यह जानकर मेरे पास अपने आप पर हैरत करने के सिवा कोई चारा नहीं है।
#notes
अच्छा लिखे!
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